UP में घटे मतदाता; बदलेगा चुनावी गणित, 2027 चुनाव में राजनीतिक दलों की बढ़ी टेंशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ सामने आ रहा है, जिसने आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम था, वहां अब मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव भविष्य के चुनावी परिणामों पर बड़ा असर डाल सकता है।
बिजनौर जिले की धामपुर विधानसभा सीट इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां पिछली बार महज 203 वोटों से जीत-हार तय हुई थी। लेकिन अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद यहां 29,821 मतदाता कम हो गए हैं। इसी तरह बाराबंकी की कुर्सी सीट पर 217 वोटों के अंतर से परिणाम आया था, जबकि अब यहां 34,925 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है।
सहारनपुर जिले की नकुड़ सीट पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां पिछला चुनाव 315 मतों के मामूली अंतर से तय हुआ था, लेकिन अब 28,055 मतदाता घट गए हैं। ये आंकड़े केवल तीन सीटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे प्रदेश में करीब 49 ऐसी सीटें हैं, जहां पिछली बार जीत का अंतर पांच हजार से कम था और अब वहां मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची में इस तरह का बदलाव चुनावी रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकता है। जिन क्षेत्रों में कम अंतर से जीत मिली थी, वहां मतदाताओं की संख्या घटने से राजनीतिक समीकरण प्रभावित होना तय है। इससे कई मौजूदा विधायकों की स्थिति कमजोर हो सकती है, वहीं विपक्ष को नए अवसर मिल सकते हैं।
राजनीतिक दल अब इन आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर अपनी रणनीति तय करने में जुट गए हैं। बूथ स्तर पर पुनर्गठन, नए मतदाताओं को जोड़ने और पुराने वोट बैंक को बनाए रखने के प्रयास तेज हो गए हैं।
मतदाता संख्या में यह बदलाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत दे रहा है। आने वाले चुनावों में इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है, जहां छोटी-छोटी गणनाएं बड़े परिणाम तय करेंगी।



