इजरायल-लेबनान में 45 दिन और बढ़ा संघर्ष विराम, दुनिया ने ली राहत की सांस

नई दिल्ली। इजराइल और लेबनान के बीच जारी तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। अमेरिका की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने 45 दिनों के लिए संघर्ष विराम (सीजफायर) बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस फैसले को मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पिछले कई सप्ताह से अमेरिका दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत करा रहा था। बढ़ते तनाव और सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी लगातार युद्धविराम बनाए रखने की अपील कर रहा था। आखिरकार कूटनीतिक प्रयास सफल रहे और दोनों पक्षों ने अस्थायी रूप से संघर्ष रोकने पर सहमति दी।
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्रों में स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती जारी है और छिटपुट तनाव की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं अलर्ट मोड में बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव को रोकने में मदद कर सकता है। पिछले महीनों में सीमा पर रॉकेट हमले, जवाबी कार्रवाई और गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी थी। इससे आम नागरिकों में भय का माहौल था और हजारों लोग प्रभावित हुए थे।
United States ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई। अमेरिकी अधिकारियों ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने भी संघर्ष विराम बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह समझौता अस्थायी राहत जरूर है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दोनों देशों को दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। सीमा विवाद, सुरक्षा चिंताएं और क्षेत्रीय राजनीति अभी भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
संघर्ष विराम बढ़ने के बाद सीमा से लगे कई इलाकों में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं।
दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले 45 दिनों में कूटनीतिक बातचीत कितनी आगे बढ़ती है और क्या यह अस्थायी समझौता स्थायी शांति का रास्ता खोल पाएगा।



