राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक, छात्र राजनीति में बढ़ी हलचल

राजस्थान। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने छात्रसंघ चुनाव 2025-26 को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए एकलपीठ द्वारा जारी व्यापक दिशा-निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल, पहले एकलपीठ ने छात्रसंघ चुनावों को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में चुनाव प्रक्रिया, प्रचार-प्रसार और उम्मीदवारों की पात्रता से जुड़े नियम शामिल थे। राज्य सरकार ने इन दिशा-निर्देशों को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील दायर की थी। अब खंडपीठ ने फिलहाल इन निर्देशों पर रोक लगाकर मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
इस फैसले के बाद छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई छात्र नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में लगातार देरी से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं कुछ संगठनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं। चुनावों को लेकर हर वर्ष राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है। ऐसे में हाईकोर्ट के इस फैसले ने छात्र राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि खंडपीठ का यह अंतरिम आदेश अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन इससे फिलहाल चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां अदालत सरकार और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का निर्णय लेगी।
छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव केवल राजनीति का मंच नहीं बल्कि छात्रों की समस्याओं और नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का माध्यम भी हैं। ऐसे में चुनावों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।



