प्रीपेड मीटर बना मुसीबत: बैलेंस खत्म होते ही अंधेरा, भुगतान के बाद भी इंतजार

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को प्रीपेड प्रणाली में बदलने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। निगेटिव बैलेंस, बिना सूचना बिजली कटौती और भुगतान के बाद भी देर से सप्लाई बहाल होने जैसी समस्याओं ने लाखों लोगों की नींद उड़ा दी है।
दरअसल, नई व्यवस्था के तहत जैसे ही स्मार्ट मीटर का बैलेंस शून्य या निगेटिव होता है, बिजली सप्लाई स्वतः कट जा रही है। 13 मार्च के बाद यह सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर कनेक्शन कटने लगे।
आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में लाखों उपभोक्ता इस समस्या से प्रभावित हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2.23 लाख से ज्यादा बिजली कनेक्शन केवल निगेटिव बैलेंस के कारण काट दिए गए, जिनमें से बड़ी संख्या में कनेक्शन समय पर बहाल नहीं हो पाए।
भुगतान के बाद भी नहीं जुड़ रही बिजली
सबसे बड़ी समस्या यह सामने आ रही है कि उपभोक्ता रिचार्ज करने के बावजूद तुरंत बिजली नहीं पा रहे हैं। कई मामलों में 24 से 36 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके पीछे तकनीकी खामियां जिम्मेदार बताई जा रही हैं—जैसे अलग-अलग पेमेंट गेटवे और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम के बीच तालमेल की कमी।
बिना सूचना कटौती से बढ़ा गुस्सा
उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें पहले से कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई और अचानक बिजली काट दी गई। कई जगह तो पॉजिटिव बैलेंस होने के बावजूद भी कनेक्शन कटने की शिकायतें सामने आई हैं।
शिकायत सिस्टम भी फेल
समस्या बढ़ने पर शिकायतों की बाढ़ आ गई। नोएडा और अन्य शहरों में हजारों शिकायतें दर्ज हुईं, जिससे ऑनलाइन सिस्टम तक ठप हो गया।
नियामक आयोग भी सख्त
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बिजली कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आयोग ने साफ कहा है कि रिचार्ज के बाद भी बिजली बहाल न होना सेवा मानकों का उल्लंघन है।
सरकार और विभाग के दावे
बिजली विभाग का कहना है कि सिस्टम को सुधारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कुछ अस्थायी नियम भी लागू किए गए हैं—जैसे आंशिक भुगतान पर अस्थायी कनेक्शन बहाल करना।
निष्कर्ष:
प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और बिलिंग सुधार था, लेकिन जल्दबाजी में लागू सिस्टम अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनता दिख रहा है। अगर तकनीकी खामियों और शिकायत निवारण व्यवस्था को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह मुद्दा और बड़ा विवाद बन सकता है।



