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डीपफेक पर सख्त दिल्ली हाई कोर्ट: आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके खिलाफ प्रसारित अश्लील और मानहानिकारक सामग्री हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत का यह रुख डीपफेक और फर्जी कंटेंट के बढ़ते खतरे पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।

याचिका में आचार्य बालकृष्ण ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर उनके नाम और छवि का दुरुपयोग कर आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने अदालत से इस सामग्री को तुरंत हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि प्रस्तुत सामग्री न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि यह व्यक्ति की गरिमा और निजता का उल्लंघन भी करती है। अदालत ने संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी कंटेंट को तत्काल प्रभाव से हटाएं और भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है कि वे अपने मंच का दुरुपयोग न होने दें, खासकर जब मामला किसी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा से जुड़ा हो। इस आदेश को डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस फैसले के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों पर निगरानी और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, यह मामला आने वाले समय में डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन और निजता के अधिकार पर भी व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

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