Whatsapp Status मामले में शिक्षक को राहत, High Court ने FIR की रद्द

नई दिल्ली/मध्य प्रदेश। एक महत्वपूर्ण मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने स्कूल शिक्षक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। शिक्षक पर व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए धार्मिक भावनाएं आहत करने और अशोभनीय सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि पोस्ट में किसी धर्म विशेष को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया था।
जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले के चिचोली कस्बे निवासी फैजान अंसारी के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर “बे-हया” शीर्षक वाली एक उर्दू कविता साझा की थी, जिसे पुलिस ने महिला विरोधी और आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की थी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद फैजान अंसारी ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान उनके पक्ष की ओर से कहा गया कि पोस्ट में किसी धर्म, समुदाय या महिला के खिलाफ प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की गई थी और इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। अदालत ने मामले के तथ्यों और पोस्ट की सामग्री का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार नहीं बनता जिससे धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप सिद्ध हो सके।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और किसी सामग्री की व्याख्या करते समय उसके वास्तविक संदर्भ को समझना जरूरी है। केवल किसी कविता या साहित्यिक प्रस्तुति को साझा करना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक उसमें स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन न हो।
इस फैसले के बाद कानूनी और शैक्षणिक जगत में चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री को लेकर सतर्कता भी आवश्यक है।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद फैजान अंसारी को बड़ी राहत मिली है और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी गई है।



