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सबरीमला विवाद: संत समिति ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग, धार्मिक अधिकारों पर जोर

केरल। केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से जुड़े विवाद में अब अखिल भारतीय संत समिति भी सक्रिय हो गई है। समिति ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर धार्मिक परंपराओं और आस्था की रक्षा की मांग की है। इस याचिका में विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का हवाला दिया गया है।

संत समिति का कहना है कि सबरीमला मंदिर की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इन्हें बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने अपनी दलील में भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ बताया है और इसी आधार पर मंदिर में कुछ आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को उचित ठहराया है। समिति का मानना है कि यह परंपरा केवल आस्था से जुड़ी नहीं, बल्कि धार्मिक अनुशासन और मान्यताओं का हिस्सा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी भी धार्मिक संस्था को अपने रीति-रिवाज और परंपराएं तय करने का अधिकार है, जिसे संविधान भी संरक्षण देता है। ऐसे में न्यायालय को इन मान्यताओं का सम्मान करते हुए संतुलित निर्णय लेना चाहिए। समिति ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

गौरतलब है कि सबरीमला मंदिर प्रवेश को लेकर पहले भी देशभर में बहस छिड़ चुकी है, जिसमें समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आई थी। अब संत समिति की इस नई पहल के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत को इस मुद्दे पर फैसला लेते समय संवैधानिक मूल्यों और धार्मिक आस्थाओं दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकारों का हनन न हो।

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