SC/ST एक्ट मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की राहत, आरोपियों पर कार्रवाई पर रोक

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना थाने से संबंधित एक एससी/एसटी एक्ट मामले में अहम राहत प्रदान करते हुए आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने ब्रजराज निषाद समेत चार अन्य आरोपियों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के बाद पारित किया।
मामले के अनुसार, अपीलकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं—323 (मारपीट), 34 (सामूहिक मंशा), 379 (चोरी), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी)-के साथ-साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(डीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने इस प्रकरण में आरोपियों को समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि मामले में लगाए गए आरोप निराधार हैं और तथ्यों के विपरीत हैं। उन्होंने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन उचित कानूनी परीक्षण के बिना जारी किए गए हैं, जिससे आरोपियों के अधिकारों का हनन हो सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने इस प्रकरण में आगे की सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले को आरोपियों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत द्वारा तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, इस आदेश से आरोपियों को तत्काल राहत मिल गई है और उन्हें किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।



