RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा स्थिर, वैश्विक सीजफायर से शेयर बाजार में जोरदार उछाल

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच आज बड़ा दिन रहा, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने इस बार भी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर बनाए रखने का फैसला लिया। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, क्योंकि विशेषज्ञ पहले से ही दरों में स्थिरता की संभावना जता रहे थे।
RBI के इस निर्णय का उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण रखते हुए आर्थिक विकास को संतुलित बनाए रखना है। मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाते हुए आगे की स्थिति पर नजर बनाए रखना चाहता है। रेपो रेट में स्थिरता का मतलब है कि फिलहाल कर्ज की दरों में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे आम लोगों और उद्योगों को राहत मिलेगी।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हुए युद्धविराम के बाद वैश्विक बाजारों में स्थिरता आई है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने की खबर ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को कम किया है, जिसके चलते तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
तेल की कीमतों में आई इस कमी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और जोरदार खरीदारी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 77,000 के स्तर को पार कर गया, जबकि Nifty 50 23,900 के ऊपर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत है कि निवेशक वैश्विक हालात को लेकर पहले से ज्यादा आश्वस्त हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर इसी तरह शांति और स्थिरता बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों को आगे भी इसका फायदा मिल सकता है। फिलहाल RBI की नीतिगत स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार ने बाजार को मजबूत समर्थन दिया है।



