अमृत कलश
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अन्तस की प्रतिध्वनि ही आपका भविष्य है
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ मनुष्य अपने परिवेश के अधीन होता है। देश, काल और परिस्थितियां उसे गहनता से प्रभावित…
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तुम स्वयंप्रकाश हो…बस बुझे हुए हो…
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थजीवन जागने के लिए है और जगाने के लिए है। जब तक तुम अपनी शक्ति को…
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जो तुम देते हो, वही लौटता है….
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ जो तुम देते हो, वही रूपांतरित होकर या विस्तार पाकर तुम्हारे पास लौटता है…वह प्रेम…
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आचरण ही देवत्व की प्राप्ति का मार्ग है
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ जीवन उसी दिन तक है, जिस दिन तक मनुष्य किसी उद्देश्य के लिए निरंतर रत…
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चेतना ही तुम्हारी मुक्ति का द्वार है…!
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ जीव, श्वास की प्रक्रिया से उत्पन्न होकर श्वास की हानि से ही शरीरमुक्त होता है।…
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उठो…! सारा आकाश तुम्हारा है
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्रीश्रीपीतांबरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ तुम जैसे हो, नैसर्गिक हो। मगर निसर्ग के भी और आयाम हैं। बीज नैसर्गिक है।…
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मन ही तुम्हारे बंधन और मोक्ष का कारण है
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री अधिष्ठाता, श्री पीताम्बरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ एकही साधे सब सधैं शास्त्रों ने कहा है कि मन एव मनुष्याणां…
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आलोचना के पात्र बनिए….
आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जिसने आलोचना को पचा लिया, उससे शक्तिशाली कोई नहीं…क्योंकि आलोचना ही परम ऊर्जा है…जो असंभव को संभव…
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