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तेल संकट के साए में ‘वेस्ट टू वेल्थ’, बायो-CNG से आत्मनिर्भरता की राह

नई दिल्ली।मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। इस तनाव के चलते तेल सप्लाई की प्रमुख लाइफलाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

इसी बीच, देश में वैकल्पिक और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों पर जोर तेज हो गया है। ऐसे समय में बनास डेयरी का बायो-सीएनजी मॉडल एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। यह मॉडल गोबर और कृषि अपशिष्ट से बायो-सीएनजी गैस तैयार करता है, जो न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि आयातित ईंधन पर निर्भरता भी कम करता है।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इस प्रोजेक्ट के जरिए गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मॉडल को देशभर में लागू किया जाए, तो भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है। मौजूदा वैश्विक संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य सुरक्षित करने के लिए अब स्वदेशी और टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों को अपनाना बेहद जरूरी है।

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